Monday, April 13, 2026
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  4. Hemant Sharma

  • आज भी रावण

    रावण जनशक्ति का शत्रु है। उसका जलाया जाना सालाना उत्सव है। पर हर साल जलाए जाने के बाद फिर से जलने के लिए पैदा होना, यही रावण होने का मतलब है। रावण के रक्तबीज चारों तरफ फैले हैं। आप जलाते जाएंगे, वह पैदा होता जाएगा। रावण प्रतीक है अधर्म, अन्याय, अहंका...

  • अनंग से लड़ने की शक्ति

    ‘शक्ति’ को साधने का उत्सव है दुर्गापूजा। हम सबकी उर्जा की इकलौती स्त्रोत है शक्ति। इसलिए हर किसी को शक्ति चाहिए। मनमोहन सिंह को आर्थिक सुधार लागू करने के लिए शक्ति चाहिए। नरेंद्र मोदी को गुजरात में कांग्रेस को हराने के लिए शक्ति चाहिए। विपक्ष को सरका...

  • स्मृतियों में मां

    एक और मातृनवमी बीत गई। फिर मैंने अपनी मां का श्राद्ध नहीं किया।  क्योंकि मैं नहीं मानता कि वे मेरे साथ नहीं है। मृत्यु सिर्फ देहावसान है। आत्मा तो अमर है। बीस बरस हुए अम्मा को गुज़रे। पर हर वक्त हर दिन वो मेरे साथ रही हैं। खुशी-गम, अच्छे-बुरे, सबमें।...

  • शरद का सौंदर्य

    हरसिंगार फूलने लगे है। उसके झड़े फूल शरद ऋतु के आने की खबर दे रहे हैं। कहते हैं हरसिंगार बड़ा शर्मिला होता है। रात में चुपके से खिलता है। और खिलते ही झरने लगता है। सड़क पर हरसिंगार के लाल डंठल वाले झड़े फूलों की चादर सुबह टहलने के मेरे आनन्द को दूना ...

  • कबीरचौरा

    मेरे मित्र चौबे जी बार-बार कहते हैं, कबीरचौरा आपसे छूट नहीं रहा है। आप भले दिल्ली में रहते हों, पर सोच के दायरे से कबीरचौरा नहीं निकल पा रहा है। वह आपके पीछे बुरी लत-सा पड़ा है। अब मेरे लिए लाख टके का सवाल है: कैसे छूटे कबीरचौरा! क्योंकि कबीरचौरा का छ...

  • हाशिये का पंछी

    अखबार में एक तस्वीर छपी है। संसद के गलियारे में उल्लुओं ने अपना डेरा जमा लिया है। यानी संसद के भीतर क्या हो रहा है, इस पर अब उल्लुओं की भी पैनी नजर है। अजब हैं उल्लू। रह रहे हैं सदन के गलियारों में और प्रभाव छोड़ रहे हैं भीतर। पूरे देश में उल्लुओं के ...

  • पालतू के सुख

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की एक नज़्म है – ‘कुत्ते’ -  ‘ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते, कि बख़्शा गया जिनको ज़ौक़-ए-गदाई (भीख मांगने की तमन्ना) ज़माने की फटकार सरमाया (पूंजी) इनका, जहां भर की दुत्कार इनकी कमाई.’ फ़ैज़ इस नज़्म में कुत्तों को इशारा बनाकर मज़ल...

  • यादों में गौरैया

    गौरैया, अम्मा और आंगन। ये मेरे बचपन की यादें हैं। अम्मा रही नहीं और अब घरों में आंगन भी नहीं रहे। इसलिए गौरैया भी घर में नहीं आती। वे यादें छिन गर्इं जिन्हें लेकर मैं बड़ा हुआ था। जीवन में चहकने और फुदकने के मायने हमने गौरैया से सीखे थे। प्रकृति से पह...

  • कृष्ण और अपन

    कृष्ण के साथ अपना रिश्ता जितना आत्मीय है, किसी और देवता के साथ नहीं। बचपन से एक तादाम्य है। सखा भाव है। रा...

  • करिश्मे की विदाई

    चुनाव में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन हाल के चुनावी नतीजों ने पहली दफा कांग्रेस के प्रथम परिवार की साख पर बट्टा लगा दिया है। हिंदुस्तान में राजनीति दांव-पेच से ज्यादा साख पर चलती है इसलिए कांग्रेस क...

  • एंटनी, सिंह दोनों को जाना होगा

    अब सेना भी नहीं बचेगी। उसका हाल ए.के.एंटनी और वी.के.सिंह ने मिलकर जनता पार्टी जैसा बना दिया है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप। अविश्वास और षडयंत्र के कीचड़ सेना पर उछल रहे हैं। संसद, सड़क, अदालत और म...

  • लोकतंत्र के उत्सव में ये कैसा सन्नाटा!

    ये कैसा चुनाव है। चुनाव तो लोकतंत्र का उत्सव होते हैं जिसमें राग-रंग, नोक-झोंक, चुटीले नारे, झंडे-पोस्टर और उम्मीदवारों का परिचय कराते बैनर नजर आने चाहिए। लेकिन आज कहां हैं ये सब? पिछले दिनों जब मैं ...

  • जीवन का शहर

    चाची सप्ताहांत में घर आती थीं। चाचा और चाची तीज-त्योहार और छुट्टियों में ही मिलते थे, क्योंकि चाची शहर से बाहर अध्यापन करती थीं। डेढ़ बरस पहले चाची जब सेवानिवृत्त हुर्इं तो कहा तीस साल बाद आजादी मिली...

  • दिल्ली उनका परदेस

    पिताश्री ठीक होकर बनारस लौट गए हैं। मैं उन्हें दिल्ली में उतने ही दिन रोक पाया जब तक वे बिस्तर पर थे। उनका दिल सामान्य आदमी से आधा धड़क रहा था। इस कारण शरीर के दूसरे हिस्से में ख़ून और ऑक्सीजन की आ...

  • ताज का तिलिस्म

    ताजमहल एक विस्मय है। उसका नाम आते ही न जाने कितने कहानी किस्से ज़हन में आते हैं। इतिहास की किताबों के कई पन्ने एक साथ फड़फड़ाने लगते हैं। मुमताज महल का चेहरा आंखों में घूमने लगता है। और दिल में शाह...

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