हिसार में कांग्रेस अपनी वजह से हारी है। पर उसकी जमानत अन्ना ने जब्त कराई है। अन्ना के ‘कांग्रेस हराओ’ अपील से हिसार में बदलाव की आंधी उठी है। बदलाव की यह हवा ठीक वैसी ही है जैसी 1974 में जबलपुर और 198...
रथ आवाम से नहीं जोड़ता है। जनता से दूर ले जाता है। रथ सामंती प्रतीक है। हमारी परम्परा में रावण रथी है। और रघुवीर विरथ। रथ लोक से काटता है। फिर भी लालकृष्ण आडवाणी बिना घोड़ों के रथ पर सवार होने को आतुर हैं। पार्टी, मित्...
प्रणब मुखर्जी ने चिदम्बरम से हाथ तो मिला लिया पर दिल नहीं। प्रणब मुखर्जी से बवाली नोट प्रधानमंत्री कार्यालय ने बनवाया था और सुलह वाला बयान सोनिया गांधी ने दिलवाया। सरकार, कांग्रेस और टू-जी तीनों का यही संकट है। राजनीति के सूत्र सोनिया गांधी के ...
पंद्रह अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री जिस जादू की छड़ी को ढूंढ रहे थे। वो चल गई। फर्क इतना कि छड़ी प्रधानमंत्री ने नहीं जनता ने चलाई। 73 साल के एक निहत्थे बूढे़ ने छड़ी चलाई और इतिहास बन गया। जीत जनता की हुई। हम भारत के लोग जीते। एक बार फिर दुन...
जनता बड़ी है या संसद? यह बहस सरकार ने छेड़ी है। अन्ना के आंदोलन को भटकाने के लिए। क़ानून सड़क पर नहीं, संसद में बनता है। अन्ना संसदीय प्रक्रिया की अवमानना कर रहे हैं। अन्ना संसदीय प्रक्रिया को ब्लैकम...
आधा-अधूरा मानसून आ गया लेकिन सावन नहीं आया। न तन भीगा, न मन नहाया। न धरती की कोख से सौंधी ख़ुशबू फूटी। न मोर नाचे न कोयल कूकी। न कजरी सुनाई दी और न राग मल्हार की तान। बस, सावन के बहाने पत्नी मायके चली गईं। कुछ इस तर्ज़ पर कि ‘‘तेरी दो टकियों की नौकरी...
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