अब सेना भी नहीं बचेगी। उसका हाल ए.के.एंटनी और वी.के.सिंह ने मिलकर जनता पार्टी जैसा बना दिया है। एक" /> अब सेना भी नहीं बचेगी। उसका हाल ए.के.एंटनी और वी.के.सिंह ने मिलकर जनता पार्टी जैसा बना दिया है। एक" /> अब सेना भी नहीं बचेगी। उसका हाल ए.के.एंटनी और वी.के.सिंह ने मिलकर जनता पार्टी जैसा बना दिया है। एक" />
अब सेना भी नहीं बचेगी। उसका हाल ए.के.एंटनी और वी.के.सिंह ने मिलकर जनता पार्टी जैसा बना दिया है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप। अविश्वास और षडयंत्र के कीचड़ सेना पर उछल रहे हैं। संसद, सड़क, अदालत और मीडिया में पहली दफ़ा रक्षामंत्री और सेना प्रमुख एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं। शायद इन्हें नहीं पता कि इन कुकर्मों से हमारी सम्मानित और समर्पित सेना बदनाम हो रही है। आज़ाद भारत में सेना विवादों से दूर रही है। पर पहली दफ़ा रक्षामंत्री और सेना प्रमुख एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अब तो सेना की गोपनीय जानकारी लीक कर जनरल बगावत पर अमादा दिख रहे हैं। वे दुनिया को बता रहे हैं कि हमारी सेना के पास हथियार घटिया हैं। गोला बारूद नहीं हैं।
पहले उम्र फिर घूस और अब घटिया हथियार और गोला बारूद के टोटे का सवाल खड़ा करके सेना प्रमुख ने सरकार और सेना को आमने-सामने किया है। पिछले एक साल से जो कुछ घटा है उससे ज़ाहिर है कि सेना प्रमुख जनरल सिंह का विश्वास सरकार पर नहीं है और रक्षा मंत्री एंटनी सेना प्रमुख पर भरोसा नहीं करते। सेना प्रमुख कहते हैं कि घटिया ट्रक की ख़रीद के लिए उन्हें 14 करोड़ की घूस की पेशकश की गई थी। जिसे उन्होंने रक्षामंत्री को बता दिया था। लेकिन सेना प्रमुख ने मामला क्यों नहीं दर्ज कराया। वे चाहते तो घूस का प्रस्ताव देने वाले बिचौलिए को ग़िरफ्तार करवा सकते थे। मामला दर्ज करा सकते थे। पर उन्होंने नहीं किया। रक्षामंत्री ने भी सुनकर अनसुना किया। कोई कार्रवाई नहीं की। क्योंकि उन्हें अपने सेना प्रमुख पर भरोसा नहीं था।
सेना में भ्रष्टाचार के मामले में ऐसी चुप्पी, निष्क्रियता और अनिर्णय क्यों? क्या ए.के.एंटनी रक्षामंत्री बनने लायक हैं? और क्या सरकार पर अविश्वास जता सेना प्रमुख सेना की कमान संभालने की पात्रता रखते हैं? उन्हें पद मुक्त क्यों नहीं किया जाता। देश को इसका जवाब चाहिए। गए एक साल से रक्षा मंत्रालय और सेना प्रमुख के बीच जो कुछ हो रहा है वह देश, सरकार और सेना के लिए कलंक है। रक्षामंत्री एंटनी ईमानदारी के अवतार हो सकते हैं। पर जिस ढंग से वे सेना से जुड़े मुद्दों पर लापरवाह रहे और मामलों को जैसा हैंडल किया वो शर्मनाक है। पहले सेना प्रमुख के उम्र विवाद को ‘मिस हैंडल’ किया और अब सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार की जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई न करने से वे कटघरे में हैं। एंटनी रद्दी ट्रकों की ख़रीद मामले में सीबीआई जांच करा अपने दायित्व से बच नहीं सकते। अब तक वे क्या कर रहे थे? अपने जनरल के आरोपों को अनसुना क्यों किया? घूस के आरोप की जांच तक नहीं कराई। बिना रीढ़ के रक्षामंत्री जी आप कैसे करेंगे देश की रक्षा?
दूसरी तरफ़ जनरल वी.के.सिंह ने तो सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं। वे लगातार सेना प्रमुख के बजाए राजपूत नेता की तरह व्यवहार करते रहे। अपनी उम्र के मामले में उन्होंने राजपूत सांसदों से पैरवी करवाई। बाक़ायदा एक दस्तखत अभियान भी चलवाया। सांसदों के इस दस्तखत अभियान का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के बाहुबली सांसद धनंजय सिंह कर रहे थे। कांग्रेस के भीतर उनकी लॉबिंग कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की। इसी से उनकी ईमानदारी परखी जा सकती है। उनकी बददिमागी का आलम देखिए कि वे अब प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी लीक कर रहे हैं। दरअसल वे रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आने की जमीन तैयार कर रहे हैं।
जनरल सिंह के पास इस बात का जवाब नहीं है कि जब कोई उन्हें 14 करोड़ की घूस की पेशकश कर रहा था तो वे चुप क्यों बैठे रहे। उस आदमी को ग़िऱफ़्तार क्यों नहीं कराया? घूस देने वाला उन तक कैसे पहुंचा। क्यों नहीं उन्होंने मामले की जांच ही करवाई। दरअसल, जनरल सिंह ये बताना चाह रहे हैं कि देश भ्रष्टाचार में डूबा है और सेना भी उसमें शामिल है। वे अकेले ईमानदार हैं। जो भ्रष्टाचार मिटाने की कोशिशि में लगे हैं। उसी की वजह से शहीद हो गए। सरकार ने उम्र विवाद में उन्हें झटका दिया। वे ये भी बताना चाह रहे हैं कि उनसे पहले भी सेना में भ्रष्टाचार था और उनके बाद भी रहेगा।
सवाल किसी एंटनी या सिंह का नहीं है। पानी सिर के ऊपर से जा रहा है। अब दोनों को जाना होगा। अब सवाल तादाद के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी सेना की साख का है। हमारे लोकतंत्र में तमाम संस्थाओं में आई गिरावट के लिहाज़ से इस पर आंच कम आई है। इसे बचाइए।
Top News
Latest News