Wednesday, September 16, 2026
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टीका-टोपी के आगे भी देखिए...

Sachin Sahay

13 अप्रैल को नीतीश कुमार ने कहा था कि राजनीति में सत्ता के लिए कभी टोपी भी पहननी पड़ती है कभी टीका भी लगाना पड़ता है। नीतीश का सीधा इशारा नरेन्द्र मोदी की तरफ था। कहते हैं समझदार को इशारा काफी है और बीजेपी में सभी समझदार निकले। बीजेपी ने नीतीश के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। लेकिन उस दिन नीतीश कुमार ने ये भी कहा था कि बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी थे जो सबको साथ लेकर चलते थे। अटल राजधर्म की बात करते थे।

13 अप्रैल के ठीक 13 दिन बाद इन दोनों बातों का जवाब खुद नरेन्द्र मोदी ने दिया। 26 अप्रैल को रामदेव के मंच पर संतों का आशीर्वाद लेकर मोदी बोले कि उनकी सरकार सर्वे भवंतु सुखिना: के सिद्धांत पर काम कर रही है जो सभी के कल्याण का उद्देशय लेकर चलती है। उनकी सरकार हिंदू भवंतु सुखिना: की बात नहीं करती। मोदी ने कहा कि गुजरात में जिसने उन्हें वोट दिया, जिसने नहीं दिया और जिसने वोट नहीं डाला, सबके साथ समान व्यवहार होता है। 12 साल से वहां दंगे-फसाद नहीं हुए हैं । अब टीवी पर इन बातों को सुनकर मुझे पिछले साल का अपना गुजरात दौरा याद आ गया जिसके कुछ अनुभव आपके सामने रख रहा हूं।

पिछले साल मैं अपने परिवार के साथ द्वारका सोमनाथ की यात्रा पर निकला। नरेन्द्र मोदी के गुजरात को देखने का ये मेरा पहला मौका था। इससे पहले साल 2001 में भुज में आए भूकंप को कवर करने गुजरात गया था तब गुजरात में मोदी नहीं थे। दिल्ली से अहमदाबाद की फ्लाइट में अपनी गुजरात यात्रा को लेकर दो तरह की बातें दिमाग में आ रही थी। एक तो मोदी के विकास की झलक देखने को मिल जाए और दूसरी ये बात पता चल जाए कि विपक्ष जिस मुख्यमंत्री को लगातार मुस्लिम विरोधी बता कर हमला करता रहा है वो गुजरात क्या हिंदुवादी राज्य बनता जा रहा है या भारत के किसी और राज्य जैसा ही सौ फीसदी सेक्युलर है। अहमदाबाद एयरपोर्ट उतरने के बाद पहली रात अपने भैया के फ्लैट में गुजारने पर महसूस हुआ कि बिजली तो वाकई एक बार भी नहीं गई। जब ये सवाल अपने भैया भाभी से पूछा तो उनका जवाब था कि उन्हें याद नहीं आ रहा कि पिछली बार बिजली कब कटी थी। उनका जवाब सुनने के बाद भी एक शंका थी मन में। मैंने मन ही मन सोचा कि भई जैसे अपना शोरुम हर व्यापारी चमका कर रखता है वैसे ही अगर अहमदाबाद और गांधीनगर में चौबीसों घंटे बिजली मिलती है तो इसमें बड़ी बात क्या है ? खैर सुबह तैयार होकर अहमदाबाद से द्वारिका बाय रोड 380 किलोमीटर के सफर पर निकल पड़े। लोगों ने कहा था सड़क काफी अच्छी है तो सोचा चलो देख लिया जाए कि इस दावे में कितना दम है। यकीन मानिए छह या साढ़े छह घंटे में अहमदाबाद से द्वारिका पंहुचते पहुंचते मैं काफी इंप्रेस हो गया कि पूरे सफर में सड़क इतनी स्मूथ कैसे है....मोदी के दावे में कुछ तो दम लगा।

हिंदुओं के चार धामों में से एक द्वारिका नगरी पहुंचकर बहुत अच्छा लग रहा था। होटल भी हमने लिया तो द्वारिकाधीश मंदिर से पैदल दूरी यानि वाकिंग डिस्टेंस पर ताकि सुबह सुबह भगवान कृष्ण की आरती में शामिल हो सकूं। रात हो गई ...जून के महीने में गर्मी ज्यादा थी। सोते वक्त जैसे ही एसी और पंखा बंद हुआ तो आंख खुल गई और आंख खुली तो पाया पावर कट हुआ है। कोई बात नहीं जनरेटर ऑन..एसी ऑन और हम फिर से ऑफ -मेरा मतलब सो गए। कुछ देर बाद फिर वही हुआ-दोबारा आंख खुली तो पता चला दोबारा पावर कट...इस बार थोड़ा गुस्सा आया लेकिन फिर सो गए । जब तीसरी बार पावर कट हुआ तो मैं कमरे से निकल कर रिसेप्शन पर गया। कमरे से रिसेप्शन के रास्ते में कुछ सोचता जा रहा था, मोदी के विकास के दावों को लेकर अब शंका होने लगी थी। स्वाभाविक है सफर के थकान के बाद नींद बार बार टूटे तो किसी को भी गुस्सा आएगा। ख्याल आने लगा क्या इसी के लिए बुला बुला कर कहते हैं कि कुछ दिन तो गुजारिए गुजरात में। लो आ गए...अब दूसरा दिन ही भारी पड़ने लगा।

रिसेप्शन में मौजूद होटल के कर्मचारी से मेरा पहला सवाल था कि क्या यहां बिजली का ऐसा ही बुरा हाल है। होटल वाले का जवाब था -सर आज कुछ खराबी है इसलिए बार बार बिजली जा रही है। मेरा दूसरा सवाल था तो बाकी दिन बिजली रहती है? होटल वाले ने जवाब दिया बाकी दिन पावर कट होती है लेकिन इतनी नहीं। नींद तो उड़ ही चुकी थी इसलिए मैं लॉबी में बैठा था कि कुछ देर में पांच बज जाएंगे तो नहाने जाउंगा । गुजरात की सड़क ने जो इंप्रेशन जमाया था वो बार बार की पावर कट ने कम कर दिया था। देखते देखते पांच भी बज गए। अब खुद तो कोई कृष्ण भजन आता नहीं था तो इस आस में था कि मंदिर के आस पास लाउडस्पीकर में भजन बजे तो द्वारिकाधीश मंदिर जाने से पहले थोड़ा भक्ति का माहौल बना लिया जाए। तभी एक लाउडस्पीकर बजा बिस्मिल्ला ए रहमान ए रहीम के साथ अजान शुरु हो गई। मैं दंग रह गया और सोचने लगा कि हिंदुओं के इतने बड़े धाम में, भगवान कृष्ण के सबसे बड़े मंदिर के पास सुबह सुबह राधे -कृष्ण की जगह अजान सुनाई दे तो ये सिर्फ एक सेक्युलर मुल्क के सेक्युलर राज्य में ही सकता है।

मन ने फिर करवट बदली। अब सोचने लगा कि उन तमाम लोगों को बोलूं कि वो द्रारिकाधीश मंदिर के पास सूर्योदय के पहले के इस अजान को सुनें और उनसे पूंछू कि क्या अब भी आप ये कहेंगे कि गुजरात में मुसलमान भय में जीते हैं। क्या अब भी आप कहेंगे कि गुजरात में मुसलमानों से भेदभाव होता है। कुछ इन्हीं सवालों को मन में लिए मैं द्वारकाधीश मंदिर जाने की तैयारी करने लगा और मंदिर में कृष्ण की आरती में शामिल होकर सारी राजनीति कुछ पल के लिए भूल गया।

द्वारिका के बाद अब बारी थी भेंटद्वारिका की । भेंटद्वारिका द्वारिका के समंदर में एक टापू है । जब भगवान कृष्ण के बालसखा सुदामा उनसे मिलने आए थे तो इसी जगह पर कृष्ण ने सुदामा का स्वागत किया था उनसे भेंट की थी। भेंटद्वारिका तक सड़क नहीं जाती । ओखा पोर्ट से समंदर में नावें चलती हैं जो भेंटद्वारिका ले जाती हैं। ओखा पहुंचने के बाद ऐसे ही एक बड़े नाव में सवार हो गए। नाव भेटद्वारिका की ओर बढ़ रही थी । नाव में कुछ गुजराती औरतें राधा-कृष्ण का भजन गा रही थीं। तभी ध्यान गया कि पीछे की ओर बैठे कुछ टोपी वाले भी इस भजन में ताली बजा कर उनका साथ दे रहे थे। और ये वही टोपी है जिसकी तरफ नीतीश जी का इशारा है। वो नज़ारा देखकर और अच्छा लगा। भेटद्वारिका पहुंचने पर जब मंदिर की ओर जाने वाली तंग गलियों और बाज़ार से गुज़रा तो वहां इतनी टोपियां दिखीं कि लगा ही नहीं कि मैं भगवान कृष्ण के मंदिर की तरफ बढ़ रहा हूं। वहां भय-भय का नहीं भाई- भाई का माहौल था। नीतीश जी जिस टीका और टोपी की बात कर रहे थे वहां मुझे दोनों साथ साथ दिखे थे।

अब कुछ और सच्चाई पर नज़र डालते हैं। मोदी आज जिस सर्वे भवंतु सुखिना: की बात कर रहे हैं, क्या आंकड़े उसका समर्थन करते हैं? खासकर मुस्लिम समुदाय की बात की जाए तो। इंटरनेट में मुझे कुछ तथ्य मिले वो सुनिए। आज गुजरात में मुसलमानों में साक्षरता का दर 73.5 फीसदी है जो नेशनल औसत 59 फीसदी से कहीं ज्यादा है। आज गुजरात के ग्रामीण इलाकों में मुसलमानों की प्रति व्यक्ति आय 668 रुपए है जबकि भारत के ग्रामीण इलाकों में ये औसत 553 रुपए है। उसी तरह गुजरात के शहरी इलाकों में मुसलमानों की प्रति व्यक्ति आय 875 रुपए है जबकि देश में ये आंकड़ा 804 रुपए प्रति व्यक्ति का बैठता है।

पता नहीं कांग्रेस के नेता ये बात क्यों नहीं समझ पा रहे हैं कि मोदी के विकास के दावों के सामने गुजरात में मुसलमानों के भय दिखाने का तरीका अब ज्यादा दिन नहीं टिकने वाला है। अब तो मोदी भी साफ कर चुके हैं कि वो टीका और टोपी साथ लेकर चलने वाले हैं। तो अगर मोदी के विकास के दावों को गलत बताना है तो कुछ रिसर्च कीजिए। जब मोदी कहते हैं कि अभी तक तो वो गुजरात में कांग्रेसियों द्वारा किए गए गड्ढे भर रहे हैं तो उसका जवाब भी कुछ आंकड़ों से दीजिए। आप बताइए कि मोदी से पहले भी गुजरात किन किन क्षेत्रों में देश के दूसरे राज्यों से आगे था। आप साबित कीजिए कि बिल्डिंग और पूरा ढांचा आपने खड़ा किया है और और नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ प्लास्टर चढ़ाकर रंग रोगन किया है। कुछ मेहनत कीजिए। सिर्फ किसी को 'फेंकू' कह देने से आपका 'पप्पू' पास होने वाला नहीं है।

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